Tuesday, 6 January 2009

तमीज से !

बूरा जो देखन मै चला ,बुरा न मिल्या कोई
जो दिल देखन आपना मुझसे बुरा न कोई
- कबीर

अच्छा बोलना एक कला है , हम हर दिन कितने शब्द बर्बाद कर देते है
अक्सर हम गुस्सा हो कर या अहम् के कारन दोसोरो को कड़वा बोल देते है
इससे हमारी कमज़ोर मानसिकता साबित होती है !
किस बात का गुस्सा जब हर समस्या का हल है
किस बात का अहम् जब हमारा जीवन शब्दों पर आधारित है
शास्त्रों का मानना है की हर वस्तु वापिस मिलती है यानि हम सब भाग्य या काल चक्र के आस पास घूमते है ! आप किसी को अच्छा बोलेंगे तो कोई आपको भी अच्छा बोलेगा !
कड़वा बोल एक मक्खी की तरह है, एक के पीछे हज़ार तैयार है
हर शब्द एक पूँजी है उसका सही इस्तेमाल करे
संसार मे हर सफल आदमी एक अच्छा वक्ता होता है , पर अच्छा बोलने का मतलब तमीज या विनर्मता और सुबुधि का प्रयोग करना है
आपका कल्याण होगा !

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